धीरे धीरे से भाग --- 20
दीप्ती ने अपने चारो तरफ देखा तो सब उसे ही देख रहे थे सब को ऐसे अपनी तरफ देख कर वो आँखो से ही सब को घूरने लगी तो सब ने एक एक कर के अपनी नज़ारे नीची कर ली,,,,,
दीप्ती मुस्कुराती हुई मोहन को देखने लगी तो वो भी मुस्कुराते हुए बोल ओह बम की गोली अब चल यही दिन गुजरना है क्या तुझे,,,,,
मोहन ने चंद्रतल बारालाछा ट्रैक जाने का प्रोगाम बनाया था ये जगह दीप्ती की पसंदीदा जगह मे से एक थी और दीप्ती कभी यहाँ आई नहीं थी पर उसे ऐसी ही जगह पसंद आती थी दीप्ती की ख़ुशी के लिए ही मोहन ने यहाँ आने प्लान बनाया था,,,,
मनाली बहुत ही खूबसूरत शहर है बर्फ से ढकी ऊँची ऊँची पहाड़ो की चोटियां वैसे तो यहाँ की घूमने की जगह सभी खूबसूरत है पर चंद्रतल बारालाछा 4300 मीटर की ऊँचाई पर बसी बहुत ही खूबसूरत झील है ये यहाँ की सबसे ऊँची झील है। प्राकृतिक सुंदरता यहाँ देखते ही बनती है बिल्कुल शांति का वातावरण रहता है । झील पर ज़ब उगते सूरज की किरणें पानी में झलकती है तो ये दृश्य इतना खूबसूरत होता है ती उसका बखान करना मुश्किल है,,,,
अगर कोई कवि यहाँ आए तो उस की रचना इस नज़ारे को देख कर खुद बा खुद बन जाएगी,,,,,
यहाँ पर जो भी घूमने आता है वो भी इस नज़ारे को देखते ही फोटो खींचे बिना नहीं रह सकता,,,,
हर तरफ बस प्रकृति की खूबसूरती मानो जैसी बिखरी पड़ी हो वहाँ आ कर ऐसा लगता है की बस यही के हो कर रह जाओ, ताज़गी की लहर यहाँ आने वालो के रोम-रोम को पुलकित कर देती,,,,,,
मोहन ने दीप्ती को नहीं बताया था की वो कहा जा रहे है मोहन दीप्ती को सरप्राइज देना चाहता था,,,,
ज़ब दीप्ती वहाँ गयी तो उसका मन ख़ुशी से भर गया, वो भागते हुए अपने दोनों हाथो को फैलाकर दौड़ रहीं थी जैसे उड़ जाना चाहती हो अपनी आँखो को चारो तरफ घुमा घुमा कर देख रहीं थी,,, कभी ख़ुशी से झूम उठती तो कभी अपनी आँखो को मालती तो कभी उन्हें बड़ी कर लेती उसके चेहरे की चमक बढ़ती ही जा रहीं थी इतना खूबसूरत दृश्य को देख कर,,,,,,
वो ख़ुशी से पागल हो रहीं थी मोहन को पकड़ कर उसने उसे भी गोल गोल घुमा दिया आसमान को देख कर गुनगुना रहीं थी,,,,
दीप्ती का ख़ुशी का ठिकाना नहीं था रिया सिद्धांथ और उनके दोस्त सभी खुश थे सभी अपने तरीके से इंजॉय कर रहे थे लड़की लड़के स्विमिंग कर रहे थे तो कुछ लड़कियां पानी में पैर डालकर नीचे बैठी हुई थी,,,,
कुछ खेल रहे थे मोहन और दीप्ती देखते ही देखते कुछ ही देर मे आँखो से उझाल हो गयें रिया और सिद्धांथ ने भी ध्यान नहीं दिया, दोनों कहा चले गयें,,,,
. दोनों ही यहाँ की खूबसूरती मे इतना ख़ो गयें थे की उन्हें इस बात का ख्याल ही नहीं रहा, की वो दोनों सब लोगो से बहुत दूर निकल आए है,,,,,
मोहन और दीप्ती एक चट्टान पर बैठकर सूर्यास्त होने का सुंदर नजारा देख रहे थे सूरज की लालिमा आकाश पर फैली हुई थी पहाड़ो के बीच मे से गुजरता हुआ सूरज अपनी सुंदरता बिखर रहा था दोनों का ये नज़ारा देखते हुए ना जाने कब एक दूसरे का हाथ दोनों के हाथो मे आ गयाउन्हें पता ही नहीं चला वो दोनों बहुत करीब थे एक दूसरे के दीप्ति ने मोहन के कंधे पर अपना सर रखा हुआ था,,,,,
दीप्ति मोहन से बोले, जानते हो इस समय मेरा मन क्या कर रहा है,,,,
मोहन बोला क्या ,,,,,
दीप्ति बोली, तुम्हारे गले लगने का,,,,,
यह कहकर दीप्ति मोहन के गले लग जाते हैं और उसे शुक्रिया अदा करती हैं वो तो यहां आना भी नहीं चाहती थी जब मोहन ने ही जिद की तो वो उसे माना नहीं कर पाई वो मोहन का यहां पर लाने के लिए बस का उसका शुक्रिया अदा कर रही थी अगर वह यहां ना लेकर आता तो इतनी खूबसूरत जगह का आनंद कभी नहीं होने पाती,,,,,
मोहन को आश्चर्य तो हुआ पर उसे बहुत खुशी हुई कि आज पहली बार दीप्ती उसके गले लगी है उसे भी मानो उसे समय ऐसा लग रहा था जैसे वो यहाँ बैठे बैठे जन्नत मे हो, उसकी रूह को सुकून आ रहा था धड़कनों को करारा सांसों को धड़कने के लिए नहीं राहा मिल रही हो, दोनों ही एक दूसरे को कसकर गले लगाए हुए थे,,,,
दीप्ती ने उसके चेहरे को देखा तो वह उसके चेहरे में ख़ो सी गई थी दीप्ति मोहन की भूरी झील सी आंखों में डूबती ही जा रही थे दीप्ती के लिए तो जैसे समय थम सा गया था उसकी साँसे तेज हो रही थी दिल तो राजधानी एक्सप्रेस से भी ज्यादा तेज भाग जा रहा था वह अपने हाथों से दिल को थामना चाह रही थी पर पर उसका खुद पर काबू नहीं रहा,,,
बस एक टक मोहन को निहारे जा रही थी मोहन ने उसकी आंखों में देखा उसका हाथ दीप्ती की कमर पर चला गया उसने उसे कमर से पकड़ कर अपनी और खींच लिया……
क्या दीप्ती को भी मोहन से प्यार हो गया है अगर हाँ तो वीर को छोड़ कर मोहन से शादी कर लेगी दीप्ति? घर वालों के सामने अपना और मोहन के प्यार का ऐलान कर पाएगी क्या? जाने के लिए आगे जुड़े रहे मेरे साथ
फेजिया खान
Babita patel
04-Sep-2023 08:29 AM
Awesome
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kashish
03-Sep-2023 04:31 PM
Nice
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KALPANA SINHA
03-Sep-2023 09:37 AM
Nice
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